मु ंबई, 24 अप्रैल, (न्यूज़ हेल्पलाइन) अक्सर हम रात भर जागने के बाद अगले दन सुस्ती, चड़चड़ापन और ध्यान न लगा पाने की समस्या महसूस करते हैं। इसे केवल 'थकान' समझना गलत होगा। स्वास्थ्य वशेषज्ञों के अनुसार, नींद की कमी सीधे तौर पर हमारे मिस्तष्क की कायप्रणाली को प्रभावत करती है और संज्ञानात्मक (cognitive) प ् र याओं में बाधा डालती है। मिस्तष्क पर क्या असर पड़ता है? पी. डी. हंदुजा अस्पताल की परामशदाता मनोवैज्ञानक शीना सूद के अनुसार, नींद न आने से दमाग का 'हप्पोकैम्पस' (hippocampus) प्रभावत होता है, जो याददाश्त और सीखने के लए िजम्मेदार होता है। ● अपशष्ट सफाई में बाधा: नींद के दौरान मिस्तष्क 'सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड' के जरए कोशकाओं से नकलने वाले कचरे (cellular waste) को साफ करता है। नींद पूरी न होने पर यह प्र या बाधत होती है, िजससे दमाग में धु ंधलापन (brain fog) और दशाहीनता महसूस होती है। ● नणय लेने की क्षमता में कमी: सह्या सुपर स्पेशयलटी अस्पताल के डॉ. नाना कु ंजर बताते हैं क नींद न लेने पर मिस्तष्क का 'प्रीफ्रंटल कॉटक्स' (जो नणय लेने और तक करने के लए िजम्मेदार है) कम स य हो जाता है, जबक शरीर में तनाव हामन (जैसे कोटसोल) का स्तर बढ़ जाता है। 'लो-पावर मोड' में दमाग वशेषज्ञों का कहना है क जब हम पयाप्त नींद नहीं लेते, तो हमारा दमाग 'लो-पावर मोड' में काम करने लगता है। जो काम सामान्य तौर पर हम आसानी से कर लेते हैं, उनके लए भी अधक मानसक प्रयास की आवश्यकता होती है, िजससे थकान जल्दी महसूस होती है और गलतयों की संभावना बढ़ जाती है। रकवरी के लए क्या करें? नींद की कमी को पूरा करने और मिस्तष्क को रीसेट करने के लए वशेषज्ञ ये उपाय बताते हैं: ● छोटी झपकी (Power Nap): अगले दन 20-30 मनट की छोटी नींद लेने से सतकता (alertness) बढ़ सकती है। ● हाइड्रेशन और आहार: भरपूर पानी पएं और संतुलत भोजन लें। ● डिजटल डटॉक्स: नींद न आने के बाद शरीर को रकवर करने के लए इलेक्ट्रॉनक उपकरणों से दूरी बनाएं और हल्के व्यायाम या ध्यान (meditation) का सहारा लें। ● कैफीन का सीमत उपयोग: कॉफी या चाय नींद की कमी का वकल्प नहीं है, इसलए इनका सेवन सीमत मात्रा में ही करें। वशेषज्ञों का मानना है क नींद की कमी केवल एक थका देने वाला अनुभव नहीं है, बिल्क यह मिस्तष्क का संकेत है क वह ओवरलोड हो रहा है। इसलए, अगली रात की नींद को प्राथमकता देना रकवरी का सबसे प्रभावी तरीका है।